
शुद्ध उपकर राजस्व 5,063 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल फरवरी में 13,481 करोड़ रुपये था।

बिक्री प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए होंडा कार्स इंडिया के उपाध्यक्ष (विपणन एवं बिक्री) कुणाल बहल ने कहा कि कंपनी ने फरवरी के दौरान अपनी बिक्री की गति को बनाए रखा।

धूत भाइयों के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही तब शुरू की गई थी, जब भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज द्वारा ऋण चूक पर 5,353.78 करोड़ रुपये का मांग का नोटिस जारी किया था। वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज मुख्य कर्जदार थी, जिसके लिए ये दोनों भाई व्यक्तिगत गारंटर थे।

वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर अवधि में इक्विटी में एफडीआई निवेश सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 12.69 अरब डॉलर रहा। हालांकि यह जून-सितंबर तिमाही के 16.55 अरब डॉलर से 23 प्रतिशत कम है।

समयात सर्विसेज एलएलपी एक विशेष-प्रयोजन इकाई है जिसका स्वामित्व निजी इक्विटी फर्म केदारा कैपिटल और स्विट्जरलैंड स्थित पार्टनर्स ग्रुप के पास है।

मोदी ने कहा, ‘‘ भारतीय कंपनियों को नए निवेश एवं नवाचार के साथ आगे आना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को व्यावहारिक समाधान तैयार करने और बाजार विश्वास बढ़ाने में सहयोग देना चाहिए।’’

स्थानीय लोगों ने बताया कि आजादी से पहले रूठिया परिवार सीहोर और भोपाल रियासत के सबसे बड़े पूंजीपति परिवारों में शामिल था तथा आज भी सीहोर शहर की 40 से 45 फीसदी बसाहट उनकी जमीन पर बसी है।

भारत के स्मार्टफोन बाजार में बड़ा बदलाव आया है, जहां वित्त वर्ष 2025 में पहली बार चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बिक्री में 4.5% की गिरावट दर्ज की गई. एंट्री और मिड-रेंज फोन्स की मांग घटने और प्रीमियम स्मार्टफोन्स की मांग बढ़ने से Apple और Samsung को फायदा हुआ. 45,000 रुपये से ऊपर के सेगमेंट की हिस्सेदारी बढ़कर 47% हो गई है. वहीं Xiaomi, Oppo और Realme जैसे ब्रांड्स को झटका लगा है, जबकि Vivo ने बेहतर प्रदर्शन किया है.

भारत के स्टार्टअप सेक्टर में जुलाई 2025 से अब तक 4,500 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है. फंडिंग में कमी, मुनाफे का दबाव और AI-फर्स्ट मॉडल अपनाने से कंपनियां छोटी टीम के साथ काम कर रही हैं. Livspace, Zepto और Porter जैसी कंपनियों ने भी workforce घटाई है. हालांकि, आने वाले समय में AI और ग्रीन-टेक सेक्टर में नई नौकरियों के अवसर बनने की उम्मीद है, खासकर स्पेशलिस्ट और टेक-स्किल प्रोफेशनल्स के लिए मांग बढ़ सकती है.

केयर एज रेटिंग्स के मुताबिक, भारत में संगठित ऋण का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में स्तर 53 प्रतिशत है, जो ऋण विस्तार की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।
